सत्यजित राय की कहानियां

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सत्यजित राय — दुनिया उन्हें filmmaker के तौर पर जानती है। पथेर पांचाली, चारुलता, अगंतुक — यह नाम cinema की दुनिया में legend हैं। पर बहुत कम लोग जानते हैं कि राय साहब उतने ही बड़े लेखक भी थे।

बंगाली में लिखते थे। और उनकी कहानियाँ — वो cinema जैसी ही थीं। हर scene आँखों के सामने बन जाता था।

यह किताब उन्हीं कहानियों का हिंदी अनुवाद है।

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Description

राय की कहानियों में एक ख़ास बात थी — वो किसी एक genre में नहीं रहते थे। कभी रहस्य था, कभी science fiction, कभी बिल्कुल सामान्य मध्यमवर्गीय ज़िंदगी जो अचानक किसी अजीब मोड़ पर जा खड़ी होती थी। उनका किरदार फेलुदा — बंगाल का अपना detective — पूरी एक पीढ़ी का favorite रहा है।

पर फेलुदा से अलग भी राय की कहानियाँ थीं। एक कहानी याद है जिसमें एक बुज़ुर्ग आदमी को अचानक पता चलता है कि उसके घर में कुछ है जो होना नहीं चाहिए — राय उसे इस तरह लिखते हैं कि डर और curiosity दोनों एक साथ महसूस होती हैं। ऐसा लिखना आसान नहीं।

हिंदी में यह कहानियाँ पढ़ना एक अलग अनुभव है। अनुवाद में हमेशा कुछ छूट जाता है — पर राय की कहानियों की जो core है, वो बनी रहती है।

Additional information

book-author

सत्यजीत रे

Published

January 1, 2008

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