Description
“कितने पाकिस्तान” कमलेश्वर का वह उपन्यास है जिसने हिंदी साहित्य जगत को हिलाकर रख दिया और जिसे साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सन् २००० में प्रकाशित यह रचना अपनी संरचना, विचार और भाषा तीनों दृष्टियों से हिंदी साहित्य की एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।
उपन्यास की केंद्रीय संकल्पना अत्यंत मौलिक और साहसी है — आदम नामक एक पात्र की कल्पनालोक की अदालत में इतिहास के विभिन्न कालखंडों से महान और कुख्यात व्यक्तित्वों को बुलाया जाता है। सिकंदर, हिटलर, बाबर, औरंगज़ेब, गाँधी, जिन्ना — सभी को कटघरे में खड़ा किया जाता है और उनसे पूछा जाता है कि उन्होंने अपने-अपने युग में मनुष्यता को कितनी बार और कितने टुकड़ों में बाँटा। “पाकिस्तान” यहाँ केवल एक देश का नाम नहीं, बल्कि हर उस विभाजन का प्रतीक है जो धर्म, जाति, नस्ल या राजनीति के नाम पर मनुष्य और मनुष्य के बीच खींचा गया है।
कमलेश्वर ने इस उपन्यास में इतिहास, मिथक, दर्शन और समकालीन राजनीति को एक साथ बड़ी कुशलता से बुना है। उनकी भाषा में पत्रकारिता की धार और साहित्य की गहराई दोनों एक साथ मिलती हैं। यह उपन्यास पाठक को इतिहास के प्रति अपनी समझ पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य करता है।
यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए अनिवार्य है जो इतिहास, राजनीति और मानवीय संवेदना के अंतर्संबंध को साहित्य के माध्यम से समझना चाहते हैं। शोधार्थियों, पत्रकारों, इतिहासप्रेमियों और गंभीर साहित्यप्रेमियों के लिए यह एक ऐसी कृति है जो बार-बार पढ़ी जानी चाहिए।






Reviews
There are no reviews yet.