सूरज का सातवाँ घोड़ा

धर्मवीर भारती की यह रचना 1952 में लिखी गई थी। हिंदी साहित्य में इसे एक अलग दर्जा मिला हुआ है — उपन्यास कहते हैं इसे, पर यह उपन्यास जैसा नहीं पढ़ता। कहानी के भीतर कहानी है। एक किरदार माणिक मुल्ला है जो सात रातों में सात कहानियाँ सुनाता है — और हर कहानी किसी औरत की है जिसे उसने कभी जाना, चाहा, या समझने की कोशिश की।

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Description

भारती जी ने इस किताब में जो किया वो उस ज़माने में बहुत कम लोग कर रहे थे। प्रेम को romantically नहीं, बल्कि उसकी सारी तकलीफ़, उसके सारे अधूरेपन के साथ दिखाया। हर औरत का किरदार — चाहे जमुना हो, सत्ती हो, या लिली — कोई एक dimension नहीं रखता। सब अपनी जगह पूरी हैं, और अपनी जगह टूटी हुई भी।

माणिक मुल्ला कोई hero नहीं है इस किताब का। वो बस एक आदमी है जो ज़िंदगी देख रहा है, याद कर रहा है, और किसी नतीजे पर नहीं पहुँचता। शायद इसीलिए यह किताब इतनी सच्ची लगती है।

1988 में श्याम बेनेगल ने इस पर फ़िल्म भी बनाई। नसीरुद्दीन शाह ने माणिक मुल्ला का किरदार निभाया था। फ़िल्म उतनी ही layered निकली जितनी किताब।

Additional information

Weight 1 lbs
Dimensions 25 × 30 × 10 in
book-author

धर्मवीर भारती

Published

January 1, 2008

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