गुनाहों का देवता

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धर्मवीर भारती की अमर प्रेम-गाथा “गुनाहों का देवता” हिंदी साहित्य का वह उपन्यास है जिसे एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद पाठक उसे बीच में छोड़ नहीं सकता। चंदर और सुधा के बीच की वह पवित्र, निःस्वार्थ और असंभव प्रेम-कहानी जो मन को एक अजीब मीठे दर्द से भर देती है। यह उपन्यास प्रेम की उस ऊँचाई को छूता है जहाँ समर्पण सब कुछ होता है और अपेक्षा कुछ भी नहीं। भारती जी की भाषा इतनी काव्यात्मक और सजीव है कि हर पंक्ति दिल पर नक्श हो जाती है। यदि आपने यह उपन्यास नहीं पढ़ा, तो हिंदी साहित्य का एक अत्यंत सुंदर अनुभव अभी बाकी है।

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Description

“गुनाहों का देवता” धर्मवीर भारती का वह उपन्यास है जिसने हिंदी पाठकों की पीढ़ियों को भावनात्मक रूप से झकझोरा और प्रेम के अर्थ को नए सिरे से परिभाषित किया। सन् १९४९ में प्रकाशित यह रचना आज भी उतनी ही ताज़ी, उतनी ही मर्मस्पर्शी और उतनी ही प्रासंगिक है जितनी अपने प्रकाशन के समय थी।

उपन्यास के केंद्र में हैं चंदर और सुधा — दो ऐसे युवा हृदय जो एक-दूसरे से गहराई से प्रेम करते हैं, परंतु उनका यह प्रेम सामाजिक बंधनों, नैतिक मर्यादाओं और परिस्थितियों की दीवारों से घिरा हुआ है। सुधा के पिता डॉक्टर शुक्ला चंदर को अपने बेटे जैसा मानते हैं, और यही रिश्ता उनके प्रेम के आड़े आता है। चंदर अपनी भावनाओं को दबाकर सुधा का विवाह किसी और से करवा देता है — और इस निःस्वार्थ त्याग में ही उसकी सबसे बड़ी पीड़ा और सबसे बड़ी महानता छुपी है।

धर्मवीर भारती ने इस उपन्यास में प्रेम, त्याग, पीड़ा और नैतिकता के बीच के सूक्ष्म द्वंद्व को अद्भुत संवेदनशीलता से उकेरा है। उनकी भाषा में एक दुर्लभ काव्यात्मकता है — संवाद इतने स्वाभाविक और भावपूर्ण हैं कि पाठक स्वयं को पात्रों की जगह खड़ा पाता है। उपन्यास में इलाहाबाद के विश्वविद्यालयी परिवेश का जो चित्रण है, वह तत्कालीन भारतीय समाज और युवा मानस का एक जीवंत दस्तावेज़ भी है।

यह उपन्यास उन सभी पाठकों के लिए है जो प्रेम की गहराई को महसूस करना चाहते हैं, जो जानना चाहते हैं कि समर्पण और त्याग का वास्तविक अर्थ क्या होता है। विद्यार्थियों से लेकर प्रौढ़ पाठकों तक, हर आयु वर्ग के लिए यह उपन्यास एक अनमोल पठन-अनुभव है। “गुनाहों का देवता” पढ़कर आँखें भीग जाती हैं — और शायद यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है।

Additional information

Published

January 1, 2009

Number of Page

257

Book-Author

धर्मवीर भारती

Format

Paperback

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