माँ बेटी की सहेली

238.00

शीर्षक पढ़ते ही रुकना पड़ता है। माँ बेटी की सहेली। माँ — सहेली? ये दो शब्द एक साथ कम ही सुनाई देते हैं। घरों में माँ का रोल अक्सर authority का होता है, दोस्त का कम। तो यह किताब उसी पुरानी सोच को थोड़ा हिलाने की कोशिश करती लगती है।

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Description

यह वही लेखक जोड़ी है जिसने “बेटी के प्रति माँ के दायित्व” लिखी थी। वो किताब थोड़ी structured थी, सवाल-जवाब वाली। यह किताब उससे अलग angle लेती है — दायित्व से सहेली तक का सफ़र।

फ़र्क समझिए — दायित्व में एक बोझ है, एक फ़र्ज़ है। सहेली में बराबरी है। राज़ हैं। वो बातें हैं जो माँ से नहीं, दोस्त से होती हैं। किताब शायद यही सिखाती है कि माँ दोनों हो सकती है — और होनी चाहिए।

उस उम्र की बात सोचिए जब बेटी 13-14 साल की हो जाती है। माँ से दूरी बढ़ने लगती है। कमरे के दरवाज़े बंद होने लगते हैं। Phone पर बातें होती हैं पर माँ से नहीं। यह किताब उसी gap को address करती है — practically, बिना lecture दिए।

Additional information

book-author

चुन्नीलाल सलूजा, शीला सलूजा

format

Paperback

First Published

January 19, 2016

2 reviews for माँ बेटी की सहेली

  1. aslam

    Very good Product

  2. aslam

    Interesting

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