Description
यह वही लेखक जोड़ी है जिसने “बेटी के प्रति माँ के दायित्व” लिखी थी। वो किताब थोड़ी structured थी, सवाल-जवाब वाली। यह किताब उससे अलग angle लेती है — दायित्व से सहेली तक का सफ़र।
फ़र्क समझिए — दायित्व में एक बोझ है, एक फ़र्ज़ है। सहेली में बराबरी है। राज़ हैं। वो बातें हैं जो माँ से नहीं, दोस्त से होती हैं। किताब शायद यही सिखाती है कि माँ दोनों हो सकती है — और होनी चाहिए।
उस उम्र की बात सोचिए जब बेटी 13-14 साल की हो जाती है। माँ से दूरी बढ़ने लगती है। कमरे के दरवाज़े बंद होने लगते हैं। Phone पर बातें होती हैं पर माँ से नहीं। यह किताब उसी gap को address करती है — practically, बिना lecture दिए।






aslam –
Very good Product
aslam –
Interesting