बेटी के प्रति माँ के दायित्व

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एक माँ और बेटी का रिश्ता — दुनिया के सबसे पुराने और सबसे उलझे हुए रिश्तों में से एक। प्यार भी, ज़िम्मेदारी भी, और कभी-कभी वो अनकही खींचतान भी जो बाहर से नहीं दिखती। यह किताब ठीक उसी धागे को पकड़कर चलती है।

शीला सलूजा और चुन्नीलाल सलूजा ने मिलकर यह सवाल उठाया है जो हर घर में है पर बहुत कम जगह खुलकर बोला जाता है — एक माँ की ज़िम्मेदारी बेटी के प्रति आखिर कहाँ तक जाती है?

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Description

यह कोई रोमांटिक किताब नहीं जो बस माँ-बेटी के प्यार की तारीफ़ करे। यह practical है। ज़मीनी है। उस माँ के लिए जो चाहती है बेटी आगे बढ़े — पर समझ नहीं आता कि कहाँ साथ दें और कहाँ पीछे हट जाएँ।

कवर की नीचे की पंक्ति सब कह देती है — “आपकी बेटी के जीवन को सफल एवं सार्थक बनाने हेतु विशेषतः उपयोगी पुस्तक।” सार्थक — बस सफल नहीं, सार्थक। यही फ़र्क इस किताब को अलग बनाता है।

Additional information

book-author

चुन्नीलाल सलूजा, शीला सलूजा

format

Paperback

First published

January 18, 2016

2 reviews for बेटी के प्रति माँ के दायित्व

  1. aslam

    I like it very good product

  2. aslam

    Interesting Highly recommended

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