अर्थला

विवेक कुमार की रोमांचक कृति “अर्थला” — संग्राम-सिंधु गाथा के प्रथम खंड के रूप में — हिंदी साहित्य में ऐतिहासिक-पौराणिक कथा की एक नई और भव्य परंपरा का शुभारंभ करती है। सिंधु सभ्यता के स्वर्णिम और रहस्यमय काल में लिए जाने वाले इस कथा-संसार में वीरता, संघर्ष, प्रेम और राजनीति का अद्भुत सम्मिश्रण है। भाले की नोक और लहराती लाल पताका के प्रतीकों से सजा यह आवरण पाठक को पहली नज़र में ही एक महासंग्राम की दुनिया में खींच ले जाता है। यदि आप हिंदी में भव्य ऐतिहासिक गाथाओं के प्रेमी हैं, तो “अर्थला” आपकी अगली अनिवार्य पठन-यात्रा है।

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Description

“अर्थला” विवेक कुमार द्वारा रचित “संग्राम-सिंधु गाथा” श्रृंखला का प्रथम खंड है — एक ऐसी महत्त्वाकांक्षी साहित्यिक परियोजना जो हिंदी पाठकों को उस युग में ले जाती है जब सिंधु घाटी की सभ्यता अपने चरमोत्कर्ष पर थी और विभिन्न जनजातियों, राज्यों तथा शक्तियों के बीच अस्तित्व का महासंग्राम छिड़ा हुआ था।

उपन्यास का शीर्षक “अर्थला” स्वयं में एक रहस्य और एक आमंत्रण है। यह कथा उस काल की है जब मनुष्य की जिजीविषा, उसकी महत्त्वाकांक्षा और उसके अस्तित्व की लड़ाई सबसे आदिम और सबसे तीव्र रूप में सामने थी। इस खंड में लेखक ने कई सशक्त पात्रों की जीवन-यात्रा को एक साथ बुना है — योद्धा, शासक, सामान्यजन और वे जो इतिहास की धारा को मोड़ने की क्षमता रखते हैं।

विवेक कुमार की भाषा में एक विशेष ओज और प्रवाह है जो इस महागाथा के अनुकूल है। युद्ध के दृश्य जीवंत और रोमांचकारी हैं, तो मानवीय संबंधों का चित्रण कोमल और संवेदनशील। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और कल्पना के बीच एक सुंदर और विश्वसनीय सेतु बनाया है जो पाठक को पूरी तरह उस युग में डुबो देता है। मानचित्रों, भाले और पताका जैसे प्रतीकों का आवरण पर प्रयोग यह स्पष्ट संकेत देता है कि यह केवल एक कहानी नहीं, एक समूचे युग का पुनराविष्कार है।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित है जो हिंदी में उच्च-गुणवत्ता की ऐतिहासिक कथाओं की तलाश में हैं, जो सिंधु सभ्यता के रहस्यों और उस काल के मानव-संघर्ष को जानने के इच्छुक हैं। युवा पाठकों से लेकर इतिहासप्रेमी वरिष्ठ पाठकों तक — “अर्थला” सभी को समान रूप से बाँधे रखने में सक्षम है। श्रृंखला का यह प्रथम खंड पढ़ने के बाद पाठक निश्चित रूप से अगले खंड की प्रतीक्षा में रहेगा।

Additional information

Published

July 19, 2016

Number of Page

440

Book-Author

विवेक कुमार

Format

Paperback

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