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कर्मभूमी

कर्मभूमी

₹279.20

हिंदी साहित्य के युगपुरुष मुंशी प्रेमचंद की महान रचना “कर्मभूमि” उनके जीवनभर के लेखन प्रयासों का सार और निष्कर्ष है। यह उपन्यास एक ऐसे युवा की कहानी है जो धर्म की औपचारिकताओं और सामाजिक रूढ़ियों से जूझते हुए अपने कर्म का सच्चा मार्ग खोजता है। स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि में लिखी गई यह रचना राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक न्याय और मानवीय संघर्ष को एक साथ बड़ी कुशलता से उकेरती है। प्रेमचंद की सरल, प्रवाहमयी और मर्मस्पर्शी भाषा में लिखा यह उपन्यास पाठक को अपने साथ बाँधे रखता है और जीवन के सच्चे कर्तव्य का बोध कराता है।

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Info:

SKU: BW-100316 Categories:Arts & Literature, Fiction, Genre Fiction, India, Literature & Fiction

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Description

“कर्मभूमि” मुंशी प्रेमचंद द्वारा सन् १९३२ में रचित एक ऐसा उपन्यास है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की उथल-पुथल भरी पृष्ठभूमि में मानव जीवन के गहनतम प्रश्नों से टकराता है। कवर पर अंकित पंक्ति — “हिंदू धर्म की औपचारिकताओं का पालन करने वाले एक कमज़ोर, युवा आदमी की कहानी” — इस उपन्यास के मूल भाव को बड़े संक्षेप में व्यक्त करती है।

उपन्यास के नायक अमरकांत एक सामान्य मध्यवर्गीय युवक हैं जो धर्म के नाम पर चली आ रही रूढ़ियों और पाखंड से मोहभंग के शिकार हैं। वे अपने पिता से वैचारिक टकराव, पत्नी और प्रेमिका के बीच भावनात्मक द्वंद्व और समाज की विषमताओं के बीच अपने जीवन का सच्चा उद्देश्य ढूँढने की कोशिश करते हैं। धीरे-धीरे वे राष्ट्रीय आंदोलन की ओर उन्मुख होते हैं और अपनी “कर्मभूमि” को पहचानते हैं।

प्रेमचंद ने इस उपन्यास में जाति-भेद, छुआछूत, किसानों का शोषण, धार्मिक आडंबर और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध जन-जागरण — सभी विषयों को एक सूत्र में पिरोया है। इसमें गाँधीवादी दर्शन की स्पष्ट छाप दिखती है — सत्य, अहिंसा और सेवा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का स्वप्न। स्त्री-पात्रों का चित्रण भी इस उपन्यास में अत्यंत सशक्त है — वे केवल पार्श्वभूमि में नहीं, बल्कि संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाती हैं।

प्रेमचंद की भाषा में वह अद्भुत सरलता है जो गहरी से गहरी बात को भी सहज रूप से पाठक के हृदय तक पहुँचा देती है। यह उपन्यास विद्यार्थियों, स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में रुचि रखने वालों, सामाजिक चेतना के पाठकों और प्रेमचंद साहित्य के प्रेमियों के लिए समान रूप से अनिवार्य पठन है। “कर्मभूमि” केवल एक उपन्यास नहीं — यह जीवन में सच्चे कर्म को पहचानने की प्रेरणा है।

Additional information

Published

January 1, 1932

Number of Page

280

Book-Author

मुंशी प्रेमचंद

Format

Paperback

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