Description
“मोहन दास” उदय प्रकाश द्वारा रचित एक ऐसी उपन्यासिका है जो पाठक को समकालीन भारतीय समाज की विद्रूपताओं से रूबरू कराती है। इस कृति का नायक मोहन दास एक निम्न-मध्यवर्गीय युवक है जो अपनी मेहनत और योग्यता के बल पर एक सरकारी नौकरी पाने का सपना देखता है। परंतु भ्रष्टाचार और सत्ता के खेल में उसकी पहचान ही चुरा ली जाती है — कोई दूसरा व्यक्ति उसका नाम, उसकी डिग्री और उसकी नौकरी हड़प लेता है। मोहन दास अपने ही अस्तित्व को साबित करने के लिए दफ्तरों, अदालतों और गलियारों में भटकता रहता है, लेकिन व्यवस्था उसे पहचानने से ही इनकार कर देती है।
यह रचना केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं है — यह उस पूरी व्यवस्था पर एक तीखा व्यंग्य है जो आम आदमी को उसके अधिकारों से वंचित करती है। लेखक ने जाति, वर्ग, भ्रष्टाचार और न्याय व्यवस्था की विफलता को बेहद सूक्ष्मता और साहस के साथ चित्रित किया है। उदय प्रकाश की भाषा में एक अनोखी काव्यात्मकता है जो कथा को और भी मर्मस्पर्शी बना देती है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अनिवार्य पठन है जो हिंदी साहित्य में सामाजिक यथार्थ की गहरी समझ रखते हैं या उसे विकसित करना चाहते हैं। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्यप्रेमियों और समाज के प्रति सजग हर पाठक के लिए यह कृति एक अमूल्य अनुभव है। “मोहन दास” पढ़कर मन में जो बेचैनी और विचार उठते हैं, वे बहुत दिनों तक साथ नहीं छोड़ते — और यही किसी महान रचना की पहचान है।






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